कटेगी राह तो चलने से ही, चले
चलिये
बहुत ख़राब है मौसम अभी, चले
चलिये
KaTegi raah to chalne se
hii, chale chaliye
Bahut KHaraab hai mausam abhii,
chale chaliye
बरस रही है कड़ी धूप इन दरख़्तों
पर
टपक रही है तले तीरगी,
चले चलिये
Baras rahii hai kaDii dhuup
in daraKHto.n par
Tapak rahii hai tale tiiragii,
chale chaliye
सभी गड़े हैं दरख़्तों के मुल्क
में साहब
सभी खड़े हैं यहाँ, आप ही चले
चलिये
Sabhii gaDe hai.n
daraKHto.n ke mulk me.n saahab
Sabhii khaDe hai.n yahaa.n,
aap hii chale chaliye
किसे है वक़्त कि सुकरात की
दलील सुने
हरेक मौत तमाशा बनी, चले चलिये
Kise hai vaqt ki Sukraat
kii daliil sune
Harek maut tamaashaa bani,
chale chaliye
कभी चले तो ज़माने को साथ ले
के चले
यहाँ से राह अकेली हुई, चले
चलिये
Kabhii chale to zamaane
ko saath le ke chale
Yahaa.n se raah akelii
huii, chale cahliye
- Ravi Sinha
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तीरगी – अँधेरा; Tiiragii –
darkness
सुकरात की दलील सुने। वाह
ReplyDeleteआख़री दो शे'र बहुत उम्दा हैं। बहुत ख़ूब।
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